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विजयदशमी खत्री दिवस का कार्यक्रम धूम-धाम से मनाया 
October 25, 2020 • डाटला एक्सप्रेस

 

गाज़ियाबाद:-अखिल भारतीय खत्री युवा महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरविंद अरोड़ा ने अपने कार्यालय शालीमार गार्डन एक्सटेंशन 1 गाजियाबाद में विजयदशमी खत्री दिवस कार्यक्रम धूमधाम से मनाया।अरविन्द अरोड़ा ने कहा भारत वर्ष में मनाये जाने वाले त्यौहार किसी न किसी रूप में बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देते हैं लेकिन असल में जिस त्यौहार को इस संदेश के लिये जाना जाता है वह है दशहरा।आज हम सभी के लिए विशेष दिन है। दीवाली से ठीक बीस दिन पहले। पंचाग के अनुसार आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी को विजयदशमी अथवा दशहरे के रुप में देशभर में मनाया जाता है। दशहरा हिंदूओं के प्रमुख त्यौहारों में से एक है। यह त्यौहार मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम चन्द्र जी की लंका विजय की कहानी तो कहता ही है जिसमें अच्छाई ने बुराई पर जीत हासिल की थी जिसमें लंका में 9 दिनों तक लगातार चले युद्ध के पश्चात अंहकारी रावण को मार माता सीता को उसकी कैद से मुक्त करवाया था वहीं इसी दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार भी किया था इसलिये भी इसे विजयदशमी के रुप में मनाया जाता है और मां दूर्गा की पूजा भी की जाती है। भगवान श्री राम की रावण पर और माता दुर्गा की महिषासुर पर जीत के इस त्यौहार को बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय के रुप में देशभर में मनाया जाता है। अरविन्द अरोड़ा ने आगे कहा कि हम श्री राम जी के वंशज हैं और उन्हीं के अनुरूप अगर हम आचरण करें तो समाज को एक नई दिशा देने का कार्य कर सकते हैं। हम भगवान राम के आचरण पर चलकर सर्व समाज की सेवा कर सकते हैं। यह दिन बुराई पर अच्छाई के लिए माना जाता है इसलिए मेरा समाज के सभी बुजुर्गों, युवाओ, बहनों और माताओं से निवेदन है कि हम सभी लोग अपनी सभी बुरी बातें भूल कर एक नई दिशा में युवाओं को सहयोग देते हुए संगठन के साथ जुड़े। यह संगठन आपसे वादा करता है संगठन के प्रत्येक युवा समाज को समर्पित हैं हम सभी युवाओं ने ठान लिया है कि हम अपने समाज को एकजुट करेंगे अगर आप सभी की आहुति इसमें होगी,और भी अच्छा होगा।इसलिए आप सभी से निवेदन है कि आप सभी बुजुर्ग अपना-अपना आशीर्वाद प्यार स्नेह हम सभी युवाओं को दें जिससे समाज एक नई दिशा पर चल सकें अथवा समाज को एक नया संदेश आप लोगों से मिल सके। समाज की स्थिति 73 वर्षों में अत्यधिक पीड़ा देने वाली है। हम लोग अलग-अलग भाषाओं में बटे हुए हैं इन भाषाओं को छोड़कर अपने इतिहास को जीवित करना होगा जिसमें खत्रीयो ने देश के लिए जो बलिदान दिए है युवाओं को बताना होगा तभी हम युवा अपनी भूली हुई संस्कृति को दोबारा जागृत कर सकते हैं।

 

रोशन कुमार राय 

सम्पादक:डाटला एक्सप्रेस

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