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स्मृति शेष
December 15, 2019 • Datla Express


वासांसि जीर्णानि यथा विहाय- 
नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि ।
तथा शरीराणि विहाय जीर्णा- 
न्यन्यानि संयाति नवानि देही।।गीता।। 

(भावार्थ: जैसे मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्यागकर दूसरे नए वस्त्रों को ग्रहण करता है, वैसे ही जीवात्मा पुराने शरीरों को त्यागकर दूसरे नए शरीरों को प्राप्त होती है।) 

लोककवि एवं रंगकर्मी: स्वर्गीय मुनीश भाटिया 'घायल'


अत्यंत दुःख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि "छोरी जेल करावैगी..." जैसे मशहूर हरियाणवी गीत के रचयिता लोककवि एवं रंगकर्मी मुनीश भाटिया 'घायल' जी का दिनांक 14/12/2019 दिन शनिवार को आकस्मिक निधन हो गया। इस शोक की घड़ी में 'डाटला एक्सप्रेस' समूह उनकी आत्मा की शान्ति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता है कि वो उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दे तथा उनके परिवारी जनों और मित्रों को इस कष्ट को सहने की आत्मिक शक्ति प्रदान करे। 

डाटला एक्सप्रेस (समाचार पत्र)
संपादक: राजेश्वर राय 'दयानिधि'
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