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मुंबई में होगा अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति का बारहवां राष्ट्रीय अधिवेशन
January 27, 2020 • Datla Express

पंडित सुरेश नीरव

 

डाटला एक्सप्रेस 
व्हाट्सप- 9540276160 
datlaexpress@gmail.com

नई दिल्ली-  देश की अग्रणी साहित्यिक संस्था अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति कश्मीर, गुवाहाटी, शिरडी, गोवा, शिमला, ग्वालियर, मुरैना, बैंगलूरू, दिल्ली, अंडमान, मसूरी  में अपने ग्यारह सफल राष्ट्रीय अधिवेशन करने के बाद अपना बारहवां द्वि-दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन आगामी ०३ और ०४ फरवरी को महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के अंधेरी पश्चिम स्थित प्रसिद्ध सा-रे-गा-मा-पा स्टूडियो में आयोजित करने जा रही है।

इस मुंबई महोत्सव के संयोजक पुरुषोत्तम नारायण सिंह के अनुसार इस अधिवेशन में डॉक्टर मधु चतुर्वेदी, सुधेंदु ओझा, पंकज प्रसून, डॉक्टर वीणा मित्तल, सविता चड्ढा, डॉक्टर कल्पना पांडेय, रामवरण ओझा, विनोद श्रीवास्तव, तृप्ति मिश्रा, महेश बैसोया,मधु मिश्रा, डॉक्टर वागीश सारस्वत, डॉक्टर दमयंती शर्मा, अस्तित्व शेखर, देवमणि पांडेय, केशवराय सहित अनेक प्रतिष्ठित रचनाकार भाग ले रहे हैं।सुप्रसिद्ध मीडिया पर्सन गजेन्द्र सिंह इस महोत्सव के मुख्य अतिथि होंगे तथा अध्यक्षता विख्यात हिंदी साहित्यकार पंडित सुरेश नीरव करेंगे। अधिवेशन में हिंदी दशा और दिशा विषय पर विचार संगोष्ठी, पुस्तक प्रदर्शनी और कवि सम्मेलन के अलावा चुनिंदा साहित्यकारों को इस अवसर पर सम्मानित भी किया जाएगा। सम्मानित होने वाले साहित्यकारों में मुख्य रूप से शामिल हैं.....

साहित्य सृजन सम्मान से अलंकृत होंगे कवि देवमणि पांडेय-
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गीत और ग़ज़ल के प्रतिष्ठित हस्ताक्षर देवमणि पाण्डेय को उनके उल्लेखनीय साहित्यिक अवदान के लिए इस वर्ष के प्रतिष्ठित साहित्य सृजन सम्मान से संस्था अलंकृत करेगी। 4 जून 1958 सुलतानपुर (उ.प्र.) में जन्मे देवमणि पांडेय हिन्दी और संस्कृत में प्रथम श्रेणी एम.ए. हैं और गीत, ग़ज़ल एवं कविताएं सभी विधाओं में सृजन करते हैं। उल्लेखनीय है कि इनकी दो ग़ज़लों को वर्ष 2017 में जलगांव विश्व विद्यालय के एमए हिंदी के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।  'दिल की बातें', ‘खुशबू की लकीरें’ और 'अपना तो मिले कोई’ देवमणि पांडेय की चर्चित काव्य कृतियां हैं। देवमणि पांडेय ने कई फिल्मों, सीरियलों और अलबमों के लिए भी गीत लिखे हैं। जिसमें कि फ़िल्म 'पिंजर' के गीत 'चरखा चलाती माँ' को वर्ष 2003 के लिए बेस्ट लिरिक आफ दि इयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। फिल्म लेखन के अलावा पत्रकारिता से भी आप संबद्ध रहे हैं। और इस कारण में सांध्य दैनिक संझा जनसत्ता में कई सालों तक साप्ताहिक स्तम्भ साहित्यनामचा का आपने लेखन किया है। हिंदी और उर्दू की प्रमुख पत्रिकाओं में  आपकी ग़ज़लें प्रकाशित होती रहती हैं। देश-विदेश में कई पुरस्कारों और सम्मान से इन्हें अलंकृत किया जा चुका है। 

देवमणि पांडेय जाने माने शायर और सिने गीतकार होने के साथ साथ लोकप्रिय मंच संचालक भी हैं। देश विदेश में वे अनेक कार्यक्रमों का संचालन कर चुके हैं। सिने गीतकार के रूप में देवमणि पांडेय के कैरियर की शुरूआत निर्देशक तिग्मांशु धूलिया की फ़िल्म हासिल से हुई। इसके बाद डॉक्टर चंद्रप्रकाश द्विवेदी की फ़िल्म 'पिंजर' में उनके लिखे गीत चरखा चलाती मां को सन् 2003 के लिए बेस्ट लिरिक ऑफ दि इयर अवार्ड से नवाज़ा गया। गीतकार देवमणि पांडेय ने कहां हो तुम और तारा: दि जर्नी आॅफ लव आदि फिल्मों को भी अपने गीतों से सजाया है। उन्होंने सोनी चैनल के धारावाहिक एक रिश्ता साझेदारी का और स्टार प्लस के सीरियल एक चाबी है पड़ोस में, भी अपने क़लम का जादू दिखाया है। संगीत अल्बम गुज़ारिश, तन्हा तन्हा और बेताबी में उनकी ग़ज़लें काफ़ी पसंद की गईं। देश विदेश में कई अवार्ड से सम्मानित कवि देवमणि पाण्डेय की अनेक रचनाएं हिंदी-उर्दू की प्रमुख साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। संप्रति आप मुंबई में निवास कर रहे हैं।
संपर्क:: Devmani Pandey : 
B-103, Divya Stuti, Kanya Pada, Gokuldham, Near Maharaja Tower, Film City Road, Goregaon East, Mumbai-400063, 9821082126 devmanipandey@gmail.com

डॉक्टर वागीश सारस्वत को व्यंग्य विभूति सम्मान
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वल्लभगढ़ हरियाणा से अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त कर इन्होंने उच्च शिक्षा देश के प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्थान जामिया मिल्लिया इस्लामिया, दिल्ली से पूरी की और फिर कुछ दिन वहां सक्रिय पत्रकारिता करने के उपरांत ये मुंबई आ गए और फिल्म निर्माण,निर्देशन और पटकथा लेखन से सक्रिय रूप से जुड़ गये। इन दिनों जहां डॉक्टर सारस्वत फिल्मोनिया के डायरेक्टर हैं वहीं साहित्यिक संस्था वाग्धारा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा साहित्यिक पत्रिका 'वाग्धारा' के संपादक भी हैं। आपकी साहित्यिक कृति "छप्पर में उड़से मोरपंख" ने साहित्य जगत में आपको एक विशिष्ट पहचान दी है। संप्रति आप देश की अनेक सामाजिक साहित्यिक संस्थाओं से संबद्ध हैं। काव्यजगत में एक व्यंग्यकार के रूप में इन्होंने ख्याति अर्जित की है। डाक्टर वागीश सारस्वत के व्यंग्य विधा के समग्र रचनात्मक अवदान को रेखांकित करते हुए देश की अग्रणी साहित्यिक संस्था अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति (दिल्ली) ने इन्हें इस वर्ष के 'व्यंग्य विभूति' सम्मान के लिए चयनित किया है। उल्लेखनीय है कि मुंबई में आगामी ०३ फरवरी को होने जा रहे समिति के राष्ट्रीय अधिवेशन में यह पुरस्कार डॉक्टर सारस्वत को प्रदान किया जाएगा।

शेखर "अस्तित्व" होंगे  गीत-गंगा सम्मान से अलंकृत-
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 मुंबई के गीतकार शेखर अस्तित्व को अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति ने इस वर्ष के 'गीत गंगा' सम्मान के लिए चयनित किया गया है। महाराष्ट्र के गौंदिया में जन्मे शेखर अस्तित्व की शिक्षा-दीक्षा मध्य प्रदेश के बालाघाट में हुई जहां इनकी माताजी स्कूल प्रिंसिपल थीं और पिताजी समाज सेवा में रत थे। चूंकि पिताजी भी थोड़ा बहुत लिखते इसलिए लेखन के प्रति रुचि बचपन से ही जागृत हो गई और छठवीं कक्षा में पढ़ते समय से ही स्कूल की कविता प्रतियोगिताओं में इन्होंने भाग लेना शुरू कर दिया। उस समय के स्थानीय समाचार पत्रों में गीत, ग़ज़ल, और कविताएं प्रकाशित भी होने लगीं। यहीं से मंचों पर काव्यपाठ का सिलसिला शुरू हुआ जो अब तक जारी है। इसी क्रम में एक बार जब शेखर अस्तित्व मुंबई आये तो फिर यहीं के होकर रह गये और यहां के विभिन्न साहित्यिक, सांगीतिक कार्यक्रमों में सहभागिता होने लगी। लेखन यात्रा के दौरान फिल्मों में गीत लिखने का स्वप्न इनके मन में सदैव पलता रहा। इसी क्रम में इत्तफाक से एक बार श्री रविन्द्र जैन जी से शेखर की भेंट हुई, तो फिर ये उन्हीं के साथ जुड़ गये और सहायक के रूप में काम करने लगे। यहीं से इनके फिल्मी सफर की शुरुआत हुई। रविन्द्र जैन जी के साथ काम करते हुए ही, रामानंद सागर, सूरज बड़जात्या, विकास कपूर इत्यादि से इनका परिचय हुआ और यहीं से धारावाहिकों में गीत लेखन की इनकी शुरुआत हुई।

धारावाहिकों में गीत लेखन- साईबाबा, रामायण, जय श्री कृष्णा, मीरा, शनिदेव, बजरंगबली, नव्या, महादेव, सिया के राम, राधा कृष्ण आदि पैंतीस से अधिक धारावाहिकों में शेखर अस्तित्व ने गीत लेखन किया है। फिल्मों में गीत- शेखर अस्तित्व ने धारावाहिकों के अलावा फिल्मों में भी गीत लिखे हैं जिनमें फिल्म "रॉकी हैंडसम", "इश्क़ क्लिक", "माई फ्रेंड्स दुल्हनियां" सहित अनेक फिल्में हैं लेकिन पहचान मिली फिल्म "संजू" के गीत "कर हर मैदान फतेह" से, जिसे स्वर दिया था सुखविंदर सिंह और श्रेया घोषाल ने और संगीत से सजाया था संगीतकार विक्रम मोंट्रोज ने। इस गीत के लिए इन्हें "इंडीवुड एकेडमी" का साल 2018 का बेस्ट लिरिसिस्ट अवॉर्ड भी मिला। उल्लेखनीय है कि यह गीत 2018 के फिल्म फेयर पुरस्कार के लिए भी नॉमिनेट हुआ। इसके साथ ही  शेखर का फिल्म "प्रस्थानम" का गीत -  दिल बेवड़ा भी काफी लोकप्रिय हुआ है। हाल ही में लेखक निर्देशक विकास कपूर की आने वाली फिल्म "चल जीत लेे ये जहां" के लिए भी इनके गीत रिकॉर्ड हुए हैं। शेखर अस्तित्व फिल्मों के लोकप्रिय गीतकार तो हैं ही इसके अलावा काव्यमंचों पर भी आग्रहपूर्वक सुने जानेवाले गीतकार हैं। गीत विधा के लिए किये गए इन्हीं अप्रतिम अवदान के लिए शेखर अस्तित्व को देश की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति ने गीत विधा के अपने प्रतिष्ठित अलंकरण 'गीत गंगा' सम्मान के लिए चयन किया है। आगामी ०३ फरवरी को मुंबई में आयोजित होने जा रहे समिति के बारहवें राष्ट्रीय अधिवेशन 'मुंबई महोत्सव' में शेखर अस्तित्व को यह सम्मान प्रदान किया जाएगा।

तृप्ति मिश्रा को मिलेगा पर्यावरण संरक्षण सम्मान
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इस वर्ष २०२० के प्रर्यावरण संरक्षण सम्मान के लिए मध्यप्रदेश इंदौर की तृप्ति मिश्रा का चयन किया गया है। यह सम्मान इन्हें मुंबई में आयोजित हो रहे बारहवें राष्ट्रीय अधिवेशन में आगामी ०३ फरवरी को प्रदान किया जाएगा। मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के प्रतिष्ठित ब्राह्मण परिवार में जन्मीं तृप्ति बचपन से ही बहुमुखी प्रतिभा की धनी रही हैं। गाना, नृत्य, कहानियां, कविताएं लिखना, मिट्टी की मूर्तियां बनाना और पेटिंग स्केचिंग आदि इनके सृजनात्मक शौक थे। चूंकि माताजी अध्यापिका थीं और हिंदी और संस्कृत की विदुषी थीं इससे तृप्ति को गहरी रुचि हिंदी साहित्य के प्रति होती गयी। आपके पति कैप्टन आशीष मिश्रा भारतीय सेना अधिकारी थे। जो 2002 में आर्मी छोड़कर अपने पैतृक शहर महू मध्य प्रदेश आकर बसे जहाँ से तृप्ति की ज़िंदगी की दूसरी पारी शुरू हुई। घर में रहते हुए तृप्ति लगातार विभिन्न विषयों पर स्वतंत्र लेख करती रहीं। वक़्त के साथ बेटा थोड़ा बड़ा हुआ तो परिवार की जिम्मेदारियों के साथ सामंजस्य बैठाते हुए लघु उद्योग निगम और खादी बोर्ड से जुड़कर विभिन्न विधाओं में गांव-गांव में प्रशिक्षण देकर महिलाओं को स्वावलंबी बनाती रहीं।साथ ही मिट्टी के गणेश का निःशुल्क प्रशिक्षण हर जगह देती रहीं, ताकि प्लास्टर ऑफ पेरिस के गणेश ना खरीदकर महिलाएं घर पर ही मिट्टी के गणेश स्वयं बना सकें। निःस्वार्थ अनवरत इस काम को वे अपने प्रशिक्षण शिविरों  के साथ करती रहीं। जून 2014 को एक सड़क दुर्घटना में बेटा और पति घायल हुए। पति नहीं रहे ज़िन्दगी ठहर गयी मगर श्री गणेश की कृपा से अपने अंदर की मातृशक्ति के साथ तृप्ति एक बार  फिर सर उठाकर खड़ी हो गईं। 

ज़िंदगी की तीसरी पारी में सिक्योरिटी एजेंसी व्यवसाय के साथ स्वतंत्र लेखन कार्य और पर्यावरण को सहेजने के प्रण को आगे बढ़ाती हुई इनकी अनंत यात्रा जारी है। 5000 से ज़्यादा महिलाओं को प्रशिक्षण देने पर इन्हें सूक्ष्म-लघु-मध्यम उद्यम मंत्रालय से और मध्य प्रदेश महिला वित्त विकास निगम द्वारा महू के स्मोकिंग के काम को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने पर 2007 में पुरस्कृत किया गया है। इसके साथ ही रोटरी क्लब द्वारा 2016 में इन्हें नेशन बिल्डर अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है, और हाल ही में इन्हें नारी शक्ति अवार्ड से भी नवाजा गया है।