सेना के शौर्य को समर्पित काव्य संध्या 'दयानिधि अब तो लो अवतार...!' का भव्य आयोजन संपन्न
March 4, 2019 • Datla Express

(साहित्यिक हलचल)

डाटला एक्सप्रेस 

रिपोर्ट: रोशन कुमार राय

बाएं से दाएं-पंडित सुरेश नीरव,सुनील शर्मा व राजेश्वर राय ''दयानिधि'' 

गाजियाबाद: 02/03/2019/शनिवार को राजेश्वर राय 'दयानिधि' के गरिमा गार्डन, साहिबाबाद, ग़ाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश स्थित आवास पर जैश-ए-मोहम्मद आतंकियों द्वारा 14/02/2019 को किए गये आत्मघाती हमले में पुलवामा, कश्मीर में शहीद हुए 45 सीआरपीएफ जवानों को श्रद्धांजलि एवं सेना द्वारा 26/02/2019 को लिए गये बदले (एअर स्ट्राइक) विषय पर आधारित सेना को समर्पित एक ""शौर्य काव्य संध्या"" "दयानिधि अब तो लो अवतार...!" का ट्रू टाइम्स (दिल्ली एवं लखनऊ, उ०प्र० से प्रकाशित दैनिक) एवं डाटला एक्सप्रेस (ग़ाज़ियाबाद, उ०प्र० से प्रकाशित साप्ताहिक)समाचार पत्रों के संयोजन में आयोजन किया गया।

बाएं से दाएं विष्णुदत्त शर्मा,राजेश्वर राय 'दयानिधि' एवं पत्रकार वीरेंद्र सिंह

बाएं से दाएं पत्रकार वीरेंद्र सिंह,पत्रकार पंकज तोमर एवं पत्रकार व कवि राजेश्वर राय "दयानिधि"

इस कार्यक्रम की अध्यक्षता मशहूर अंतरराष्ट्रीय कवि पंडित सुरेश नीरव एवं संचालन डॉक्टर सतीश वर्द्धन ने बड़े ही शानदार अंदाज में किया। सरस्वती माँ के सामने दीप प्रज्ज्वलन के उपरांत कार्यक्रम की शुरुआत पंडित नमन द्वारा रचित एवं उन्हीं के द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से शाम चार बजे हुई। पंडित नमन की यह वंदना इस लिहाज से श्रेष्ठ और अनूठी थी कि उन्होंने इसमें परंपरागत रचनाओं से हटते हुए देश, समाज, युवा पीढ़ी, धर्म, भाई-चारा, प्रकृति इत्यादि के लिए माँ सरस्वती से दुआ माँगी है। पहली बार इस अलग तरह की वंदना को सुनकर लोगों ने काफी सराहना की। प्रार्थना के बाद पुलवामा के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गयी और सेना के शौर्य की सराहना तथा पायलट अभिनंदन की सकुशल घर वापसी के लिए प्रधानमंत्री की अदम्य राजनैतिक निर्णय शक्ति एवं कूटनीति की सराहना के साथ काव्य संध्या की औपचारिक शुरुआत करते हुए पिलखुआ, हापुड़ से पधारे मंच संचालक डॉक्टर सतीश वर्द्धन ने आये हुए कवियों का विस्तृत परिचय कराया। आये हुए कवियों में शामिल थे....सर्वश्री पंडित सुरेश नीरव (कार्यक्रम अध्यक्ष), पंडित नमन, विष्णु विराट, डॉक्टर सतीश वर्द्धन, सुरेन्द्र साधक, डॉक्टर अनिल वाजपेयी, ग़ज़लकार सुरेश मेहरा, डॉक्टर अशोक ज्योति, पत्रकार एवं कवि प्रदीप जैन एवं रामवीर आकाश।

तत्पश्चात आयोजक राजेश्वर राय के अनुज उद्योगपति अजय कुमार राय द्वारा सभी कवियों को माल्यार्पण कर उनका स्वागत किया गया, फिर 'श्री गोवर्धन विद्या निकेतन' 62/4 बलबीर नगर, शाहदरा, दिल्ली-32 के प्रबंधक श्री विष्णु दत्त शर्मा द्वारा राजेश्वर राय 'दयानिधि' को उनके पत्रकारिता, साहित्यिक लेखन एवं समाजसेवा में किये गये योगदान को देखते हुए ""श्री गोवर्धन दास स्मृति सम्मान 2019"" से सम्मानित किया गया। उसके बाद कविताओं का दौर चला जिसमें रामवीर आकाश ने अपना सुप्रसिद्ध प्रेमगीत........

तुम्हारे नैन के द्वारे मेरे कुछ ख़त भी रक्खे हैं।
उन्हें मत बांचना उनमें बहुत सी वेदनाएं हैं।

सुनाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। आवाज़ और अन्दाज़ के धनी कवि एवं प्रसिद्ध गायक सुरेन्द्र साधक ने अपनी ओजपूर्ण रचना......

हिन्दुस्तान-हिन्दुस्तान,तू है दिल जिगर औ' जान।
तू आरजू पहली,तू ही आख़िरी अरमान ।।

सुनाकर कार्यक्रम को ऊँचाई बख़्शी। कवि प्रदीप जैन ने पढ़ा कि.....

सौ खून तुम्हारे माफ़ किये-
अब और नहीं
वीर सैनिकों का गुस्सा बेक़ाबू है-
आतंकी अड्डे खड्डों में बदल दिये,
अभिनंदन का अभिनंदन अभी-अभी किया-
गर बचा सको तो पाक बचा लो नापाकों!

पंडित नमन ने पढ़ा कि.......

भारत माता बोल रही है हे सेकुलर नेताओं!
वोटों के लालच में पड़कर इतना नहीं सताओ

पंडित सुरेश नीरव ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के वसीले से कही गयी एक हास्य व्यंग्य रचना पूरे अभिनय के साथ पढ़कर माहौल को तरोताज़ा कर दिया, उनकी कविता के मुख़्तसर से अश'आर पेश हैं, पूरी कविता उनके फेसबुक वाल पर पढ़ी जा सकती है......

मेरे ही घर में घुसकर भारत ने मुझको मारा
रो-रो के कह रहा है ये चांद, ये सितारा

दहशतगरों को हमने खुलकर पनाह दी थी
अजहर, मसूद, हाफिज सब हो गये खटारा।

अब मुंह दिखाने लायक छोड़ा नहीं है हमको
किस ज़ोर का है थप्पड़ इस मोदिया ने मारा।

गलती हुई है हमसे, मोदीजी माफ कर दो
गुस्ताखियां न होंगी, हमसे कभी दोबारा

सुलभ संस्थान के उपाध्यक्ष कवि डॉ० अशोक ज्योति ने ओजपूर्ण रचना पढ़ते हुए कहा कि......

हमारे पड़ोसी को कश्मीर चाहिए,
दिल बनकर जो अन्तस् में धड़कता है हमारे-
कहता है वो उसे धड़कन चाहिए।

कवि राजेश्वर राय ने विभिन्न समसामयिक विषयों पर अपने 1000(एक हज़ार) दयानिधि पदों की श्रृंखला में से कुछ छंद सुनाते हुए कहा कि......

राजेश्वर राय ''दयानिधि'' व पंडित सुरेश नीरव 

पाप बढ़ा जब-जब धरती पर आये बारंबार

एक बार फिर इस धरती को है तेरी दरकार

दयानिधि अब तो लो अवतार....!
--------------------------------------------
सखीखोर
इसके नाते अब सखियों को घर पे नहीं बुलाती हूँ,
बल्कि मैं ख़ुद ही जा के उनके धौरे मिल आती हूँ,
सीधा - साधा बनके, मुझे बनाके, फाँसा उन्हें करे-
और मूर्ख मैं अक्सर, झाँसे में इसके आ जाती हूँ,
ना जाने कैसा चुंबक इस सखीखोर हबिया में है-
मेरी कितनी मित्रों को, कर दिया बहादुर पार।
दयानिधि अब तो लो अवतार....!
-----------------------------------------------
जड़दार
बहुत ज़ियादा समय-समर्पण-सरमाया देना पड़ता,
तब जाके साहित्य विधा से शख़्स शानपूर्वक लड़ता,
वचन-लिंग से लेकर तथ्य-कथ्य का करके विश्लेषण-
गहराई से लिखने पर ही जा के तब खूँटा गड़ता,
बाक़ी ऊपर-ऊपर से जितना चाहे फसलें पाँगो-
असली उपज तभी होगी जब होंगी वो जड़दार।
दयानिधि अब तो लो अवतार....!
--------------------------------------------
लूट
अस्पताल - स्कूल - प्रसाधन-फैशन लॉबी लूट रहीं,
खान - पान इंडस्ट्री भी जेबों पर सबके टूट रहीं,
केमिकल युक्त दवाओं पे हर्बल-आयुर्वेदिक लिखके-
कितनी कंपनियाँ अरबों का माल वर्ष में कूट रहीं,
टुन्न कस्टमर माँगे माल अगर भँड़ुए से तो साला-
बुढ़िया पेश कर रहा, कह करके कमसिन-गुलनार।
दयानिधि अब तो लो अवतार...!
--------------------------------------------
राष्ट्रवाद
कई क्षेत्रीय क्षत्रप दलगत राजनीति के पल्ले हैं,
काँग्रेस वाले केवल पाकिस्तानी दुमछल्ले हैं,
कई सिर्फ सरकारों में रहने खातिर सौ रूप धरें-
एक शब्द में बोलूँ तो वो टॉप क्लास के दल्ले हैं,
राष्ट्रवाद की उम्मीदें बस बीजेपी से क़ायम थीं-
लेकिन वो भी बदल रही हर रोज़ नये किरदार।
दयानिधि अब तो लो अवतार....!
---------------------------------------
कवि डॉक्टर सतीश वर्द्धन ने पढ़ा कि....

देश पे शहीद होके वीर जब घर लौटा,
बहन बोली भैया राखी किसको मैं बाँधूगी।
पिता बोला जय हिंद रोते हुए......
माँ ने कहा देश पे तो मैं सौ सौ बेटों को वारूँगी।
तोतली ज़बान से ये बेटी रोते रोते बोली,
पापा जी अब पापा मैं किसको पुकारूँगी।
पथराई आंखें लिए मन ही मन बोली पत्नी
"नाथ ये बताओ कैसे जीवन मैं गुजारूंगी"।।

कवि अनिल बाजपेई ने अमर शहीदों को समर्पित अपनी प्रसिद्ध रचना पढ़ी.......

कवि अनिल वाजपेयी जी का सम्मान करते पत्रकार पंकज तोमर 

देश की वीरांगना दुर्गाबाई और जीजाबाई थीं।
जिसने देश पर किये समर्पित प्राण वो लक्ष्मीबाई थीं।

कवि विष्णु शर्मा ने पढ़ा कि......

मेरी बर्बादियों का जश्न मनाने वाले ।
तुझको कफ़न भी नसीब नहीं होगा ।

कवि सुरेश मेहरा ने पढ़ा कि......

आग मजहब ने लगाई हर तरफ
लड़ रहा भाई से भाई हर तरफ
आदमी को लूटते ही जा रहे
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई हर तऱफ

 

उक्त काव्य संध्या में कवियों के साथ साथ मीडिया कर्मियों की भी काफी उपस्थिति रही, जिनमें मुख्य रूप से लोक जागृति के संपादक संतोष कुमार मिश्र, पत्रकार वीरेन्द्र सिंह, पंकज तोमर, सौरभ वशिष्ठ, सुनील कुमार, रामनाथ प्रजापति इत्यादि शामिल थे। आखिर में राजेश्वर राय ने अपने समापन संबोधन में बरसात होने के बावजूद आये हुए समस्त कवियों एवं अतिथियों का शुक्रिया अदा किया और जल्द ही एक और कार्यक्रम के साथ मिलने का वादा करते हुए समापन की घोषणा की।


तत्पश्चात डिनर की शुरुआत हुई, लोगों ने भोजन और राजेश्वर राय 'दयानिधि' के आतिथ्य सेवा की भूरि-भूरि प्रशंसा की।. 

पत्रकार पंकज तोमर का सम्मान करते उद्योगपति श्री अजय शर्मा 

लज़ीज़ व्यंजनों का लुत्फ उठाते कवि व पत्रकार गण