विश्व पर्यावरण दिवस (05 जून) पर वृक्ष की करना ख़ातिरदारी
June 2, 2019 • Datla Express

धरती बोल रही है,वृक्ष लगायें वृक्ष उगायें।

निज अंतर-पट खोल रही है,वृक्ष लगायें वृक्ष उगायें।।

कटते पेड़ सिमटते जंगल,कैसे हो जंगल में मंगल
गरमी से भू डोल रही है,वृक्ष लगायें वृक्ष उगायें।
तपती धरती बोल रही है,वृक्ष लगायें वृक्ष उगायें।।

वृक्ष नहीं कैसे हो बरसा,बरसा को हर कोई तरसा
प्रकृति स्वयं में खौल रही है,वृक्ष लगायें वृक्ष उगायें।
तपती धरती बोल रही है,वृक्ष लगायें वृक्ष उगायें।।

वृक्ष बिना जीवन हो कैसे,काम न आ सकते हैं पैसे
बड़ी बड़ों की पोल रही है,वृक्ष लगायें वृक्ष उगायें।
तपती धरती बोल रही है,वृक्ष लगायें वृक्ष उगायें।।

वृक्ष की करना ख़ातिरदारी,नेता हो या फिर व्यापारी
वृक्ष से भू अनमोल रही है,वृक्ष लगायें वृक्ष उगायें।
तपती धरती बोल रही है,वृक्ष लगायें वृक्ष उगायें।।

सतीश तिवारी 'सरस',
नरसिंहपुर (म.प्र.)
चलित वार्ता-9993879566

 

डाटला एक्सप्रेस
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