पुस्तक समीक्षा सिलबट्टा (कहानी संग्रह) लेखक: कुशलेन्द्र श्रीवास्तव
July 31, 2019 • Datla Express

(पुस्तक समीक्षा) 

सिलबट्टा (कहानी संग्रह)
लेखक: कुशलेन्द्र श्रीवास्तव
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श्री कुशलेन्द्र श्रीवास्तव की दस कहानियों का संग्रह है -- "सिलबट्टा" । इन कहानियों को अनुराधा प्रकाशन, जनकपुरी, नई दिल्ली ने प्रकाशित किया है। श्री कुशलेन्द्र श्रीवास्तव की कहानियों  में भारतीय सामाजिक व्यवस्था के ताने बाने का चित्रण बड़ी कुशलता से होता है। भारतीय सामाजिक परिवेश के परिवारों के राग-विराग, उनके सुख-दुःख को अभिव्यंजित करने वाली कहानियों का संग्रह है --- "सिल बट्टा" । श्री कुशलेन्द्र श्रीवास्तव की कहानियों में  प्रायः भारतीय मध्यम वर्गीय परिवार की कथा होती है। वस्तुतः भारतीय मध्यम वर्ग ही भारत का बहु संख्यक समाज है। इन अर्थों में हम कह सकते हैं कि श्री कुशलेन्द्र की कहानियां भारतीय सामाजिक व्यवस्था का आईना हैं।

श्री कुशलेन्द्र की कहानियों के पात्र  प्रतिकात्मक भी हैं। उनकी कहानियों के पात्र आपको अपने आस पास ही घूमते टहलते मिल सकते हैं। प्रायः श्री कुशलेन्द्र की कहानियों के पात्रों के नाम के साथ कोई उप-नाम नहीं होता। उनकी कहानियां प्रायः किसी बहुत छोटे नामविहीन नगर या नामविहीन कस्बाई कल्चर को रेखांकित करते चलती हैं। प्रतीक रूप में कह सकते हैं कि इनके ये पात्र भारत के किसी भी समुदाय या किसी भी स्थान से हो सकते हैं। श्री कुशलेन्द्र की प्रत्येक कहानियों में प्रतिकात्मक रुप से किसी न किसी समस्या के प्रति पाठकों का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश होती है, तो संकेत रूप से उसका समाधान भी बताते चलते हैं, पर कहीं भी यह प्रतीत नहीं होता है कि लेखक कोई उपदेश दे रहा है या अपनी कोई बात उस पर थोपना चाहता है, और यही वह स्थल है जहाँ कुशलेन्द्र अपने आपको अपने समकालीन कथाकारों से अलग कर लेते हैं और बहुत आगे निकल जाते हैं।

इस कहानी संग्रह में सिलबट्टा, एक प्यार अधूरा सा, सुधा, अस्तगामी सूरज, और  लौट आई सुनीता, कस्बाई संस्कृति में  किशोरवय के प्रेमियों के प्रेम की वह कथायें हैं जो असमय ही मारे जाने के लिये शापित हैं। प्रेम की यह सभी कथायें अत्यंत मार्मिक हैं। पाठक इन कथाओं को पढ़ते पढ़ते यह सोचने और मानने के लिये बाध्य हो जाता है कि इन पात्रों के प्रेम में असीम गहराई है।  "अम्मी की औलाद ",  आन का फैसला, जवान बेटे की मौत,  आखिर सूरज हार गया, समाज में फैली विसंगतियों की कहानियां हैं, तो माँ आंखें खोलो और व्यस्तता ऐसी कहानियां हैं जिसमें एकाकीपन के संत्रास की पीड़ा का मार्मिक चित्रण हैं। अत्यंत संक्षेप में इस संकलन की कथावस्तु निम्नानुसार हैं 

सिलबट्टा 
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कालेज स्तर पर जन्म लेने वाली ऐसी  अधूरी  प्रेम कथा है जिसका नायक प्रतिभाशाली और सहृदयी है पर औसत रंग रूप के कारण नायिका द्वारा अस्वीकृत कर दिया जाता है। इस कथा के कथा नायक का कालेज में सभी अपने अपने स्तर पर उपयोग करते हैं। लेखक के अनुसार :----- " सिलबट्टा होता ही इसके लिये है चटनी पीस लो,मसाला पीस लो और दीवार से लगाकर टिका दो ।" कालांतर में यही सिलबट्टा ऊँची सरकारी नौकरी में पहुंचता है । लेखक का संदेश है :--- "व्यक्तित्व का निर्माण शरीर से नहीं आंतरिक प्रतिभा से होता है ।"


एक प्यार अधूरा सा 
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किशोरवय की अधूरी प्रेम कथा, प्रेमिल भावनाओं की सरस अभिव्यक्ति, मार्मिक चित्रण, वृद्धावस्था में नायक नायिका का मिलन बहुत सुन्दर प्रेम कथा है।


आन का फैसला 
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ग्रामीण जीवन की सामंत-वादी व्यवस्था को उजागर करती कथा। पुरानी सामंत - वादी व्यवस्था का उत्तराधिकारी गांव के लोकतांत्रिक व्यवस्था को पचा नहीं पा रहा है अपने पुराने दबदबे को बनाने के लिये षडयंत्र कर गांव के कुछ लोगों को बदनाम कराता है फिर न्याय करने के नाम पर उन्हीं बेकसूरों पर अन्य दण्ड आरोपित कर प्रताड़ित करता है। मार्मिक कथा।


सुधा 
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सुधा और गौरव की प्रेम कथा। सुधा अपने संपन्न परिवार का त्याग कर अपाहिज गौरव से प्रेम विवाह करती है और कालातंर से यह सिद्ध करती है कि उसका यह निर्णय सही था। रोचक कथावस्तु प्रेरक कहानी ।


अम्मी की औलाद 
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साम्प्रदायिक दंगे में अपने पति और अन्य प्रियजनों को खो चुकी अम्मी अपने स्नेहिल स्वभाव के कारण सभी की प्रिय है। उसका इकलौता बेटा शहर में पढ़ता है और बहकावे में आकर आतंकवादी बन जाता है। एक तेज घटनाक्रम में अम्मी अपने इस इकलौते बेटे को गोली मार देती है। प्रेरणादायी और अत्यंत मार्मिक कथा ।


अस्तगामी सूरज 
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किशोरावय की मार्मिक प्रेम कथा। सुन्दर चरित्र चित्रण, उदात्त प्रेम, मार्मिक कथा ।


लौट आयी सुनीता 
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संग्रह की एक अन्य सुंदर प्रेम कथा, सुन्दर चरित्र चित्रण, उदात्त प्रेम ।


जवान बेटे की मौत 
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संग्रह की अत्यंत मार्मिक कहानी। गरीब मां-बाप अपनी इकलौती संतान को बहुत अभावों में पालते हैं। उसे बहुत अच्छी शिक्षा दिलाने में सफल रहते हैं। बेटा इन्जीनियर बन जाता है, अच्छी नौकरी मिलती है,घर में खुशियां आती हैं, तभी कुछ अज्ञात लोगों द्वारा उसकी हत्या कर दी जाती है। बेबस मां बेटे के हत्यारों को खोजते मर जाती है। अत्यंत मार्मिक कहानी ।


मां आंखें खोलो
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संग्रह की एक और मार्मिक कथा। गांव में रहने वाली गरीब विधवा मां अपने इकलौते पुत्र की देखभाल और पढ़ाई लिखाई में अपने पास की सभी संपत्ति बेच डालती है। बेटा पढ़ने के लिए शहर चला जाता है। मेहनत करता है और कलेक्टर बन जाता है। माँ गांव में एकाकी रह जाती है। वृद्धावस्था में एकाकीपन की पीड़ा भोगती वृद्धा का अद्भुत चित्रण, मार्मिक कहानी ।

आखिर सूरज हार गया 
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छोटे एकाकी परिवार की विभीषिका दर्शाती,इस संग्रह की सबसे अधिक मार्मिक कहानी। माता-पिता के आकस्मिक देहावसान के बाद दस वर्षीय रमेश पर अपने सात बर्ष के भाई के देखभाल की जिम्मेदारी आ जाती है । भोजन और भूख-प्यास से सूरज की मौत हो जाती है ।


व्यस्तता

एकाकी पन की समस्या को उजागर करती कहानी। बेटा-बेटी के न रहने पर सूने घर में मां परेशान हो उठती है। आज के छोटे-छोटे परिवारों की एक बड़ी समस्या की ओर लेखक ने ध्यान आकर्षित किया है।

कुशलेन्द्र जी के इस संकलन को पढ़ते समय बार-बार एक ही ओर ध्यान जाता है कि यह घटना तो अभी पड़ोस में ही हुई है या यह घटना तो अभी-अभी उसी के साथ हुई है। संकलन के सारे पात्र जाने पहचाने लगते हैं, और यही कुशलेन्द्र जी की विशेषता है। कुशलेन्द्र श्रीवास्तव की कलम का जादू इस संग्रह में खूब चला है, विशेषकर मार्मिक घटनाओं का चित्रण करते समय। हिन्दी साहित्य के कथा प्रेमी पाठकों के लिये यह कहानी संग्रह संग्रहणीय है। 
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समीक्षक:  डॉ० जवाहर शुक्ल
प्राध्यापक  हिन्दी


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(प्रस्तुति: डाटला एक्सप्रेस/साप्ताहिक/गाज़ियाबाद (उ०प्र०) 31 जुलाई से 06 अगस्त 2019/प्रत्येक बुधवार/संपादक: राजेश्वर राय 'दयानिधि'/email: rajeshwar.azm@gmail.com/datlaexpress@gmail.com/दूरभाष: 8800201131/व्हाट्सप: 9540276160