दयानिधि अब तो लो अवतार...!
March 8, 2019 • Datla Express

रचयिता: राजेश्वर राय 'दयानिधि'
#8800201131/9540276160
rajeshwar.azm@gmail.com
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पाप बढ़ा जब-जब धरती पर आये बारंबार
एक बार फिर इस धरती को है तेरी दरकार
दयानिधि अब तो लो अवतार....!

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901- बुड्ढामार/11.2.19/mon./4:35pm/gzb.

अभी बुढ़ापे में जाड़ा, ज़्यादा बॉडी को धरता है,
सेंकूँ धूप, ताप लूँ कौड़ा लेकिन ना मन भरता है,
बिना नहाये, गाँती बाँधे, कंबल ओढ़े पड़े-पड़े-
गलते पानी से चूतर धोने को ना दिल करता है,
सीने में जमने से कफ़, खाँसी-ख़ुश्की बढ़ गयी बहुत-
जब से ये पड़ रही घनी...............है सर्दी बुड्ढामार।
दयानिधि अब तो लो अवतार....!
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902- मस्ती/12.2.19/tue./pm/gzb

कोई भी हो दर्द मगर रहता हूँ हरदम मस्ती में,
कभी नहीं रोना रोता, मँहगाई में या सस्ती में,
ये पा जाऊं, वो पा जाऊं,भागूँ दौलत के पीछे-
ऐसी आदत नहीं कहीं शामिल है मेरी हस्ती में,
खाने-पीने-सोने-पढ़ने-लिखने से जो समय बचे-
उसमें जीने भर का, कर लेता कुछ कारोबार।
दयानिधि अब तो लो अवतार....!
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903- छोटन/13.2.19/wed/am/gzb

हरि इतने हम बड़े नहीं कि क्षमा करें इन छोटन को,
छुट्टा छोड़ नहीं सकते, इन लंठ-कुमारग खोटन को,
आँख दिखायें, हाथ लगायें, हूटिंग करते हैं जिससे-
ढील नहीं देता कतई, इनको मस्तक पर लोटन को,
बात-बात में बलवा करने वाले अब के ये बच्चे-
टाइट गर ना हो तो कर देंगे बहना-महतार।
दयानिधि अब तो लो अवतार....!
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904-छपास/13.2.19/wed./am/gzb

दो सत्तर जो शुद्ध नहीं लिख पाते पोएम में अपनी,
उनको भी कृतियां चहिए डेली अख़बारों में छपनी,
कई-कई कविताएँ दिन में लिखने वालों का ये सच-
है कि इनका ओर - छोर ना, ताल - मात्रा, है मपनी,
ऊपर से इन बद्स्वर लिखनेवालों को संपादक हम-
छाप कर रहे दूषित.........लेखन का पवित्र संसार।
दयानिधि अब तो लो अवतार...!
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905-आर्तनाद/15.2.19/fri./2:39am/gzb

नेताओं के घर की दीवारें भी काफी मोटी हैं,
आर्तनाद भी नहीं पहुंचती ऐसी मूई खोटी हैं,
उनके अंदर पले शरीरों में बहता है लहू पतित-
और आत्मायें भी बुजरी उसमें बसती खोटी हैं,
जनता के बदले ये तो अपनी चिंता में जीते हैं-
है तो चलती रहे, न है तो बन जाये सरकार।
दयानिधि अब तो लो अवतार....!
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906- पुलवामा हमला/14.2.19/4pm/gzb

दुश्मन पाक हमारा हमको, घुसके घर में मारा है,
हमला नहीं युद्ध का कर आगाज़ हमें ललकारा है,
उन्निस का ये प्रेमदिवस दे गया दग़ा दिल को ऐसा-
पुलवामा की सड़कों पर बह गयी लहू की धारा है,
चौवालिस सैनिक मेरे मर गये सड़क पर चिथड़े बन-
मौक़ा नहीं उठाने भर को........मिला उन्हें हथियार।
दयानिधि अब तो लो अवतार....!
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907-पुलवामा हमला/17.2.19/sun/11am/gzb

उस बातूनी की बोली से उसका जलवा डूब गया,
धीरे - धीरे सिधुआ से ये देश समूचा ऊब गया,
अच्छा वक्ता-प्लेयर-शोणी सूरत का स्वामी कुत्ता-
चंद लाभ खातिर पाकिस्तानी पाल्हे में खूब गया,
आज सियासत इसे शहादत पर करते देखा तो ये-
लगा मुझे गद्दार हो गया............ये कट्टर सरदार।
दयानिधि अब तो लो अवतार....!
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908- पुलवामा हमला/18.2.19/mon/6pm/gzb

तोप-विमान-मिसाइल सारी मिलके मातम मना रहीं,
और समूचा देश पड़ा अज़लस्त - पस्त है जहाँ वहीं,
सेना की साँसों से फहराने वाला अपना झंडा-
आज लगे जाने क्यूँ वो भी छुपके है रो रहा कहीं,
पुलवामा के हमले का बदला लेने दो मोदी जी-
क्या केवल झाँकी खातिर रक्खे हो ये हथियार।
दयानिधि अब तो लो अवतार....!
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909-पुलवामा हमला/18.2.19/mon/10pm/gzb

नोट बंद करवाते हो चिल्लाककर आधी रातों में,
ख़ुफ़िया नज़र लगाये बैठे, काले धन के खातों में,
एनजीओ-फ़र्जी़ फर्मों की मुश्कों को कसके कैड़ा-
उनकी कमर तोड़ दी, छेद बनाये उनके छातों में,
पर जब वीरों के बलिदानों का बदला लेना है तो-
काँप रहे क्यूँ हाथ तुम्हारे........मोदी बरखुरदार।
दयानिधि अब तो लो अवतार...!
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910-पुलवामा हमला/19.2.19/tue./1am/gzb.

जबसे पुलवामा हमले का ब्लास्ट वीडियो देखा है,
तबसे बहुत दुश्मनी की बन गयी हृदय में रेखा है,
कभी लगे बमवर्षक लेकर सेना चढ़ी कराँची पर-
कभी लगे पी०एम० मेरा ले रहा युद्ध का लेखा है,
कभी लगे कि सुबह जगाकर बीवी मुझसे बोल रही-
देखो............! मोदी दगवा रहे हैं, सीमा पे मोर्टार।
दयानिधि अब तो लो अवतार....!
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911- धमकी/17.2.19/sun./pm/gzb.

पहले जैसा प्यार कहाँ अब देती हो मुझको बीवी,
कभी घुसी कीचन में, कभी लगाये बैठी हो टीवी,
ये बेरुखी किसी दिन तुमको भारी पड़ने वाली है-
जब जानोगी 'जान' तुम्हारा बन बैठा है परजीवी,
मेरे भी तन - मन की प्रीतम कुछ पोशीदा पीरें हैं-
जिनको हरलो छोड़छाड़ सारा कुछ कभी-कभार।
दयानिधि अब तो लो अवतार....!
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912-संविधान /18.2.19/mon./4pm/gzb.

दुनियाभर की नकल मार करके इसको बनवाया है,
समय-समय पे अंट-शंट सुविधानुसार लिखवाया है,
संविधान में जो कुछ लिखा हुआ है उससे लगता ये-
अल्पसंख्यकों-दलितों-महिलाओं का इसपे साया है,
सेकुलर-देशद्रोहियों का संरक्षण करती ये पुस्तक-
मज़लूमों खातिर बस सजा रही अभिलेखागार।
दयानिधि अब तो लो अवतार....!
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913- बीपीएल/20.2.19/thu/11:50pm/gzb

तोपें-बमवर्षक विमान-हेलमेट-जैकेट का टोटा है,
बन्दूकें-गोलियाँ-बम्ब-बारूदों से भी खोटा है,
नहीं दस दिनों से ज़्यादा लड़ पायेगा ये देश मेरा-
ऐसा अपने अनुसंधानों, में ये कैग रिपोटा है,
इतनी कमी-दरिद्री गिनवाने से लगता है जैसे-
देश नहीं, तुम चला रहे हो बीपीएल परिवार।
दयानिधि अब तो लो अवतार....!
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914-मल्तिया/23.2.19/sat./2:25am/gzb.

ललबचिया की बहन मल्तिया शोणी-सच्ची-अच्छी थी,
अल्हड़, निर्मल नीर, क्षीर, मकलाती मल्ली मच्छी थी,
मैं इक अधम प्रेम के बदले चाहा तन उसका पाना-
पर वो स्नेह सनी, मर्यादित नहीं उतारी कच्छी थी,
उसकी यादें मुझको अपराधी घोषित कर जाती हैं-
क्यूँ हम पुरुष समझते हैं संभोगों को बस प्यार।
दयानिधि अब तो लो अवतार...!
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915-कारोबार/23.2.19/sat./4pm/gzb.

चीन - पाक से जब थोड़ी सी टुन्न-फुन्न हो जाती है,
पिछली घटनाओं जैसी सरकार मात जब खाती है,
तब कवियों की टीम उठाके प्रॉफिट बड़ी सफ़ाई से-
मस्कट और माउजर मुँह से जमके ख़ूब चलाती है,
कुछ दिन छंद-सवैये-मुक्तक धूआँ देते हैं इनके-
फिर छिन जाता बेचारों से, इनका कारोबार।
दयानिधि अब तो लो अवतार....!
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916- सखीखोर/24.2.19/sun./4am/gzb.

इसके नाते अब सखियों को घर पे नहीं बुलाती हूँ,
बल्कि मैं ख़ुद ही जा के उनके धौरे मिल आती हूँ,
सीधा - साधा बनके, मुझे बनाके, फाँसा उन्हें करे-
और मूर्ख मैं अक्सर, झाँसे में इसके आ जाती हूँ,
ना जाने कैसा चुंबक इस सखीखोर हबिया में है-
मेरी कितनी मित्रों को, कर दिया बहादुर पार।
दयानिधि अब तो लो अवतार....!
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917-जड़दार/24.2.19/sun./4:30am/gzb.

बहुत ज़ियादा समय-समर्पण-सरमाया देना पड़ता,
तब जाके साहित्य विधा से शख़्स शानपूर्वक लड़ता,
वचन-लिंग से लेकर तथ्य-कथ्य का करके विश्लेषण-
गहराई से लिखने पर ही जा के तब खूँटा गड़ता,
बाक़ी ऊपर-ऊपर से जितना चाहे फसलें पाँगो-
असली उपज तभी होगी जब होंगी वो जड़दार।
दयानिधि अब तो लो अवतार....!
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918- बहुएं/25.2.19/mon./7am/gzb.

बहुएं खुलके जज़्बातों से जमके अभी खेलती हैं,
नाजायज़ शर्तें ससुरालों में हर रोज़ रेलती हैं,
अगर कभी उनकी माताओं से उलाहना दे दो तो-
वो भी आग बुझाने के बदले पेट्रोल पेलती हैं,
इतनी मनबढ़ ये प्रजाति हो गयी ज़माने में अब कि-
छोटी-छोटी बातों में.............भिजवाये कारागार।
दयानिधि अब तो लो अवतार....!
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919- लूट /25.02.19/mon./11pm/gzb.

अस्पताल - स्कूल - प्रसाधन-फैशन लॉबी लूट रहीं,
खान - पान इंडस्ट्री भी जेबों पर सबके टूट रहीं,
केमिकल युक्त दवाओं पे हर्बल-आयुर्वेदिक लिखके-
कितनी कंपनियाँ अरबों का माल वर्ष में कूट रहीं,
टुन्न कस्टमर माँगे माल अगर भँड़ुए से तो साला-
बुढ़िया पेश कर रहा, कह करके कमसिन-गुलनार।
दयानिधि अब तो लो अवतार...!
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920-राष्ट्रवाद /26.2.19/tue./10am/gzb.

कई क्षेत्रीय क्षत्रप दलगत राजनीति के पल्ले हैं,
काँग्रेस वाले केवल पाकिस्तानी दुमछल्ले हैं,
कई सिर्फ सरकारों में रहने खातिर सौ रूप धरें-
एक शब्द में बोलूँ तो वो टॉप क्लास के दल्ले हैं,
राष्ट्रवाद की उम्मीदें बस बीजेपी से क़ायम थीं-
लेकिन वो भी बदल रही हर रोज़ नये किरदार।
दयानिधि अब तो लो अवतार....!
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921- बदला /26.2.19/tue./8:40pm/gzb.

मारे अधम सूअरों को जो पाकिस्तानी थे पाले,
चौदह दो उन्निस के पुलवामा का बदला ले डाले,
जो बारह दिन पहले घंट बँधाये मेरी धरती पर-
आज करा तेरहवीं उनकी डाल दिये ऊँचे-खाले,
मेरे पवनसुतों ने लंकादहन कर दिया घुस करके-
बढ़ा दिये भारत माता का मस्तक और मयार।
दयानिधि अब तो लो अवतार....!
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922-उच्चविचार/28.2.19/thu./10pm/gzb.

सदा ज़िन्दगी हवस-हिर्स-हिंसा से हीन बिताई है,
मेहनत से जो मिला वही सूखी या चुपड़ी खाई है,
ना मैं कभी भूलके ढूँढ़ा, बैरिस्टर - हकीम भइया-
ना ही पुलिस ढूँढ़ते मुझको मेरे घर तक आयी है,
ना मैं धा के चला गिरा ना ठोकर खाके कभी यहां-
सादा जीवन जीया, रखता आया उच्चविचार।
दयानिधि अब तो लो अवतार....!
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923- खुसरा/1.3.19/fri./am/gzb.

जो भी मुँह में आये ये बेलौस बके ही जाता है,
जिससे सभी मोर्चों पर ये मात हमेशा खाता है,
मैं तो पीएम पैदा की थी काफी सोचसाच करके-
लेकिन मंदबुद्धि ये अब्बा-झब्बा-डब्बा गाता है,
एक मर्द मोदी दुश्मन की आँख काढ़ता डोल रहा-
एक हमारा खुसरा राहुल, आँख रहा है मार।
दयानिधि अब तो लो अवतार....!
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924- फ़तह/3.3.19/sun./3:25pm/gzb.

बिना भेद पाये कोई भी जीत सुनिश्चित ना होती,
अगर मुख़बिरी कच्ची है तो पायी सत्ता भी खोती,
अपने से ज्यादा दूजी कंपनियों में क्या होता है-
उसकी मालूमात् ख़ातिर हरदम रक्खो कोई सोती,
फ़तह अगर दुश्मन की लश्कर पे पाना है तुमको तो-
खोजो उस ख़ेमें में कोई...........मनमाफ़िक़ गद्दार।
दयानिधि अब तो लो अवतार...!
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925-दीनार/5.3.19/tue./6:50am/gzb.

कई सोचते हैं विदेश जा ज़्यादा माल कमायेंगे-
लेकिन पछताते हैं तब जब जाके ठोकर खायेंगे,
जब व्यवहार गुलामों जैसा इनके संग होता है तो-
ये भारत की सत्ता से फिर रो - रो दुखड़ा गायेंगे,
कौन बताये इन्हें अगर मेहनत के हो सौदाई तो-
यहीं देश में मिल जायेगा डालर - पौंड - दिनार।
दयानिधि अब तो लो अवतार....!
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926- निम्नविचार /5.3.19/tue./2pm/gzb.

रिश्तेदारों की उन्नति में कभी ख़ुशी ना पाया है,
इस दावानल में अपने दिल का दालान जलाया है,
कोई मित्र अगर आगे बढ़ गया ज़माने में मुझसे-
तो उसके निस्बत मेरा मन घृणाभाव ले आया है,
सच तो ये है ऊपर से पुरुषोत्तम जैसा बनता हूँ-
लेकिन अन्दर रखता हूँ मैं, अपने निम्नविचार।
दयानिधि अब तो लो अवतार....!
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927-फूट /05.03.19/tue./pm/gzb.

जाति-पाँति-मुखबिरी-फरेबी-झूठ-शोहदई-चोरी थी,
आलस था आकंठ भरा ज़्यादा हराम की खोरी थी,
ऊपर से हम छुआ-छूत की बीमारी से पीड़ित थे-
लेकिन उनमें खाने - पीने वाली बुद्धि अघोरी थी,
मेरी फूट उन्हें शासन करने खातिर ले आती थी-
चाहे अरबी - यवन रहे या मुग़ल - तुर्क - तातार।
दयानिधि अब तो लो अवतार....!
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928- होली/6.3.19/wed./2:33am/gzb.

नींद नहीं आती है ढंग से, पूरी रात जागता हूँ,
दारू-मुर्ग़ा-मटन-सोहारी से भी दूर भागता हूँ,
स्त्री लायक नहीं रहा, बॉडी भी ज़ंग खा चुकी है-
सो मुँह से बैठा केवल सेक्सी पिस्तौल दागता हूँ,
तुम्हीं बताओ इस हालत में कैसे मित्र मनाऊँ मैं-
खाने-पीने-उखमज वाला होली का त्यौहार।
दयानिधि अब तो लो अवतार....!
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929-यादें /6.3.19/wed./8:25am/gzb.

झोंपै - झोंपा लसरी सेम रही दरवाजे जो झूली,
ट्यूबेल वाला आम और आलू के मूरी की मूली,
मँड़ई पे चढ़ फरने वाली वो फ्रेश सब्ज़ी गाँवें की-
लौकी-कोंहणा-तोरी-चिचड़ा-सर्पुतिया भी ना भूली,
गड़ही की मछरी,आमों की पाल और महुआ,ठूसा-
के संग याद आये केला की छिम्मी वाली घार।
दयानिधि अब तो लो अवतार...!
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930-रविश कुमार /7.3.19/thu/7:15pm/gzb

इससे बढ़कर पत्रकार ना आया है कोई दाना,
निंदा सत्ता की करना इसने अपनी ड्यूटी माना,
ऐसे बना-बना के मुँह बकता है अपने चैनल पे-
जैसे यही बचा है केवल अंधों में वाहिद काना,
इसका एनडीटीवी, रंडीटीवी अभी कहा जाता-
खुद भी मुँह से टट्टी करता है ये रविश कुमार।
दयानिधि अब तो लो अवतार....!
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