गुरुकुल महाविद्यालय ततारपुर (हापुड़) में बही कवियों की त्रिवेणी
March 6, 2019 • Datla Express

डॉ. अनिल बाजपेयी कविता पाठ करते हुए 

डाटला एक्सप्रेस 

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हापुड़: (03/03/2019/रविवार) गुरुकुल महाविद्यालय ततारपुर, (हापुड़) उत्तर प्रदेश में महाविद्यालय के 54 वें वार्षिक महोत्सव के अवसर पर एक विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें देश के प्रख्यात कवि, गीतकार एवं गजलकारों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता प्रज्ञान पुरुष पंडित सुरेश नीरव ने तथा संचालन ओजस्वी कवि डॉ. अनिल बाजपेई ने किया। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रेमपाल शास्त्री एवं शिव कुमार शास्त्री ने सभी कवियों को अंगवस्त्र एवं सम्मान पत्र भेंट कर सम्मानित किया।

प्रज्ञान पुरुष पंडित सुरेश नीरव अपनी कविताओं से उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करते हुए. 

मुख्य अतिथि चौधरी सत्यवीर सिंह ने कहा कि कवि समाज का पथ प्रदर्शक है। कवि एवं साहित्यकार की लेखनी समाज को दिशा देने का कार्य करती है। इस आयोजन में विशिष्ट अतिथि अनिल गोयल, डॉ. विपिन गुप्ता, कृष्णकांत गुप्ता, प्रदीप त्यागी, हेमराज त्यागी एवं पंकज गर्ग का ख़ास सहयोग रहा। कविता प्रस्तुति के क्रम में प्रख्यात कवि प्रज्ञान पुरुष पंडित सुरेश नीरव ने इन दिनों अपनी वायरल हो रही प्रसिद्ध कविता पढ़ी......

मेरे ही घर में घुसकर भारत ने मुझको मारा
रो - रो के कह रहा है, ये चांद ये सितारा

दहशतगरों को हमने खुलकर पनाह दी थी
अजहर, मसूद, हाफ़िज़ सब हो गए खटारा

मंच संचालन करते हुए प्रख्यात कवि डॉ. अनिल बाजपेई ने पढ़ा...

इन बासंती हवाओं में महकता चंदन है
सूरज चांद सितारों का भी वंदन है
हे! भारत मां के वीर लाडले ‘अभिनंदन’
तेरा शत-शत अभिनंदन है...........!!!

एटा से पधारीं कवयित्री समीक्षा सिंह जादौन ने पढ़ा...

मैं वेदों का अमर ज्ञान, मैं वचनों की परिपाटी हूँ
मैं युद्धों का अर्जित फल, वीरों की हल्दीघाटी हूँ
मैं सत्य सनातन सी पावन मर्यादित हूँ सदियों से
मैं तन-मन से हिंदू हूँ, मैं भारत मां की माटी हूँ

मनजीत सिंह अवतार ने पढ़ा.

आज तिरंगे का वंदन है भारत की तुम जय बोलो,
माथे पर रोली चंदन है भारत की तुम जय बोलो,
पाक की सीमा लांघ के आया तनिक नहीं घबराया है-
अभिनंदन का अभिनंदन है भारत की तुम जय बोलो।।

दिल्ली से पधारे कवि भुवनेश सिंघल ने पढ़ा...

शहीदों की कतारों में मैं अपना नाम लिख दूंगा-

करूंगा काम कुछ ऐसा अलग अंजाम लिख दूंगा।

साहिबाबाद से आए चेतन आनंद ने पढ़ा कि....

अंधेरों में नया सूरज उगना जानते हैं हम
चमन उजड़ा हुआ फिर से सजाना जानते हैं हम
जमाने को दिया है प्यार का संदेश हमने तो

जो दे नफरत सबक़ उसको सिखाना जानते हैं हम

क्रांति की धरा मेरठ से आए सुमनेश 'सुमन' ने पढ़ा...

मेरा अरमान रह जाए वतन की शान रह जाए
जमाने में मेरी गंगाजली पहिचान रह जाए

मुरादनगर से आए कवि इंद्र प्रसाद 'अकेला' ने पढ़ा...

मातृभूमि के लाल तेरा शत-शत वंदन है
पवन पुत्र हनुमान बना मस्तक चंदन है

विशिष्ट अतिथि अनिल गोयल ने कहा कि देश के प्रसिद्ध कवियों ने अपने काव्य पाठ से सभी श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। इस तरह के आयोजन हमेशा ही प्रेरक एवं प्रासंगिक होते हैं, और इन्हें होते रहना चाहिए।